कस्बा पिलखुआ लगभग 300 साल पुराना इतिहास रखता है पिलखुआ की सबसे पुरानी आबादी चंडी माता मंदिर, जामा मस्जिद के इर्द-गिर्द बसी हुई है जिनमें आर्य नगर, बाज़ार बजाजा, शुक्लान, चाह डिब्बा, राणा पट्टी, छीपीवाड़ा, नामक मुहल्ले पुराने हैं बाकी मौहल्ले बाद में जाकर बसे हैं। पिलखुवा अपने कपड़ा उत्पाद और हथकरघा उद्योग के लिए जाना जाता है। यह पहले एक गाँव था लेकिन बाद में एक कस्बे के रूप में विकसित हुआ। पिलखुवा क़स्बा पहले गाज़ियाबाद जिले का भाग था मगर सन २०११ में तत्कालीन बसपा सरकार के कार्यकाल में इसे हापुड़ जिले में शामिल कर दिया गया। यहाँ की आबादी एक लाख से अधिक है इसके पूर्व में हापुड़ , पश्चिम में ग़ाज़ियाबाद, उत्तर में मोदीनगर व दक्षिण में बुलंदशहर स्थित है। यह नगर दिल्ली-मुरादाबाद रेलवे लाइन पर स्थित है व् जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी पर है। वर्तमान में पिलखुवा धौलाना विधान सभा व् ग़ाज़ियाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। पहले यहाँ की आबादी कन्खली झील के आस पास ही हुआ करती थी और मोहल्ला गढ़ी एक अलग बस्ती थी, मगर बढ़ते बढ़ते दो-तीन गाँव रमपुरा, पबला, जठ्पुरा और मोहल्ला गढ़ी भी पिलखुवा में ही समां गए ! आज के समय में पिलखुवा की आबादी N.H. 9 के दोनों तरफ बढती जा रही है।